एक नए अध्ययन से पता चला है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वविद्यालयों में असमानता का मूल कारण नहीं है, लेकिन यह मौजूदा अंतर को और बढ़ा रही है। अध्ययन में पाया गया कि एआई उपकरण, जैसे कि चैटबॉट और स्वचालित ग्रेडिंग सिस्टम, छात्रों के प्रदर्शन पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं, जिससे वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए नुकसान हो सकता है। यह असमानता एआई एल्गोरिदम में अंतर्निहित पूर्वाग्रहों और इन उपकरणों तक समान पहुंच की कमी के कारण हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालयों को एआई के उपयोग को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी छात्रों के लिए समान अवसर मौजूद हों। एआई के संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए नीतियों और हस्तक्षेपों को लागू करने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर आगे की जांच और बहस आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई शिक्षा में समानता को बढ़ावा दे, न कि इसे बाधित करे। यह रिपोर्ट चिली के CIPER द्वारा प्रकाशित की गई है।
