आगामी विश्व कप में टीमों की संख्या 48 करने और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को भी शामिल करने से खेल की निष्पक्षता पर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह बदलाव 1982 के 'गिजोन कांड' की याद दिलाता है, जिसमें स्पेन और अल्जीरिया के बीच एक मैच में मिलीभगत के आरोप लगे थे। नए प्रारूप के तहत, कुछ टीमें जानबूझकर हारकर या ड्रॉ खेलकर अगले दौर में आसान प्रतिद्वंद्वी चुन सकती हैं। इससे प्रतिस्पर्धा की भावना कमज़ोर हो सकती है और विश्व कप की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। फीफा ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि फीफा को इस तरह की संभावित मिलीभगत को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। खेल प्रेमियों का मानना है कि विश्व कप की प्रतिष्ठा बनाए रखना ज़रूरी है।