हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य पांच दूसरी रियायतों के माध्यम से 2.7 ट्रिलियन डॉलर की आय प्राप्त करेगा। इस खुलासे के बाद टैग भुगतान के गंतव्य और मूल रियायतें समाप्त होने के बाद टोल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ इस प्रणाली के कामकाज और प्रारंभिक मॉडल के साथ इसके मुख्य अंतरों का विश्लेषण कर रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि यह प्रणाली एक प्रकार का 'छिपा कर' है, क्योंकि यह टोल का उपयोग राज्य की आय बढ़ाने के लिए कर रही है। इस मुद्दे पर बहस जारी है, और यह देखना बाकी है कि सरकार इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया करती है। इस प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आम जनता को टैग भुगतान के उपयोग के बारे में पूरी जानकारी हो।