आजकल किशोरों में नींद की कमी एक बढ़ती हुई समस्या बन गई है, जिसका मुख्य कारण मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग है। सिर्फ़ स्क्रीन का समय ही नहीं, बल्कि लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव और सूचनाओं से निरंतर जुड़ना भी उनकी नींद को प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ छूट जाने का डर उन्हें रात में भी फोन चेक करने के लिए मजबूर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लगातार जुड़ाव किशोरों के नींद के चक्र को बिगाड़ रहा है। नींद की कमी से उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए, किशोरों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सीमित करने और स्वस्थ नींद की आदतों को विकसित करने की आवश्यकता है। माता-पिता और शिक्षकों को भी इस समस्या के प्रति जागरूक रहने और किशोरों को मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है।