चिली के CIPER द्वारा प्रकाशित एक लेख में तर्क दिया गया है कि विश्वविद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सिखाना पर्याप्त नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि यह भी तय किया जाए कि एआई का उपयोग कब और कैसे किया जाना चाहिए। लेख में एआई के नैतिक उपयोग और संभावित दुरुपयोग के बारे में चिंता व्यक्त की गई है। यह आवश्यक है कि छात्रों को एआई के प्रभावों की गहरी समझ हो और वे जिम्मेदारी से इसका उपयोग करने के लिए तैयार हों। केवल तकनीकी कौशल विकसित करने से पर्याप्त नहीं है, बल्कि एआई के सामाजिक और नैतिक निहितार्थों पर भी विचार करना महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालयों को एआई के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करने और छात्रों को इन दिशानिर्देशों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है। अंततः, एआई का लाभकारी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।