शिक्षकों के संगठन ने शिक्षा मंत्रालय की एक नीति के तहत जबरन सेवानिवृत्ति की घटनाओं की शिकायत की है। यह कार्रवाई न केवल शिक्षकों पर, बल्कि कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मियों पर भी लागू हो रही है। संगठन का आरोप है कि योग्य पेशेवरों को बिना शैक्षणिक प्रशिक्षण वाले लोगों से बदला जा रहा है। यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। शिक्षकों ने इस नीति का विरोध करते हुए इसे छात्रों के भविष्य के लिए हानिकारक बताया है। उन्होंने मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इस मामले पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।