विशेषज्ञ कोनराडो एस्टोल के अनुसार, सप्ताह के दिनों और सप्ताहांत में नींद के समय में बदलाव डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा सकता है। उन्होंने बताया कि कम सोने वाले युवाओं के मांसपेशियों की बायोप्सी में सूजन और कोशिका क्षति के मार्करों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। यह बदलाव शरीर में सूजन पैदा करता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अनियमित नींद की आदतें शरीर की जैविक घड़ी को बिगाड़ सकती हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन होता है। इस असंतुलन के कारण मूड स्विंग और डिप्रेशन जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। इसलिए, नियमित नींद का समय बनाए रखना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन नींद के पैटर्न और अवसाद के बीच संबंध को दर्शाता है।

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