नींद की कमी एक बढ़ती हुई समस्या है, जिसे अक्सर स्व-सहायता साहित्य में प्रोत्साहित किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रथा वैज्ञानिक रूप से निराधार है और इसका शरीर विज्ञान पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। पर्याप्त नींद न लेने से मोटापा, अवसाद और संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम जुड़े हुए हैं। एक सफल स्व-सहायता पुस्तक के कारण यह आदत लोकप्रिय हुई, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई जैविक आधार नहीं है। नींद शरीर के लिए आवश्यक है और इसकी कमी से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्याप्त नींद लेना महत्वपूर्ण है।