हर साल देश के विश्वविद्यालयों से हजारों छात्र स्नातक होते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में उन्हें रोजगार प्राप्त करने में कठिनाई होती है। कई उम्मीदवार साक्षात्कार में ही असफल हो जाते हैं, जबकि कुछ नौकरी पाने के बाद भी आवश्यक कौशल की कमी के कारण जल्दी ही नौकरी खो देते हैं। विशेषज्ञों और कॉरपोरेट क्षेत्र के नियोक्ताओं का मानना है कि स्नातकों के नौकरी में टिक न पाने के कई कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसके कारण छात्रों में व्यावहारिक कौशल की कमी रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए, पाठ्यक्रम में सुधार और उद्योग-आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान देना आवश्यक है। कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने से भी रोजगार क्षमता में सुधार हो सकता है।