प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक बर्नार्डो स्टमैटेस के अनुसार, भावनाएं स्थायी नहीं होतीं। वे कुछ सेकंड या मिनटों तक ही रह सकती हैं, जो कि एक अच्छी बात है। स्टमैटेस बताते हैं कि क्रोध, अपराधबोध और चिंता जैसी भावनाएं भी गुजर जाती हैं। उनका मानना है कि भावनाओं की यह अस्थायी प्रकृति, हमें उनसे निपटने और आगे बढ़ने में मदद करती है। यह विचार लोगों को भावनात्मक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करता है। स्टमैटेस का यह कथन भावनात्मक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि कोई भी भावना हमेशा के लिए नहीं रहती। इसलिए, नकारात्मक भावनाओं के समय में भी, उम्मीद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

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