मनोचिकित्सक स्टीफ़न वोइनोफ़ के अनुसार, बचपन में देखी गई कार्टून फिल्में और पुरानी यादें वयस्कों को तनाव से राहत दिलाने और नई ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नॉस्टैल्जिया, यानी पुरानी यादों में खो जाना, भावनात्मक रूप से सुकून देता है और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। यह पुरानी यादें हमें सुरक्षित और आरामदायक महसूस कराती हैं, जिससे वर्तमान की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। वोइनोफ़ बताते हैं कि कार्टून फिल्मों से जुड़ी सकारात्मक भावनाएं, वयस्क होने के बाद भी हमारे अंदर बनी रहती हैं। ये यादें हमें कठिन समय में भावनात्मक सहारा प्रदान करती हैं और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने में मदद करती हैं। इस प्रकार, बचपन की यादें और कार्टून फिल्में न केवल मनोरंजन का स्रोत हैं, बल्कि मानसिक कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
