पेरू में, सीप्लान (CEPLAN) और शिक्षा मंत्रालय (MINEDU) पर द्वैभाषी शिक्षा नीतियों में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रभाव का आरोप लगाया गया है। पत्रकार राफेल रोमेरो के एक लेख के अनुसार, यह आरोप लगाया जा रहा है कि सीप्लान और मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे एनजीओ के विचारों को शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जा रहा है। यह लेख 'लिमा ग्रिस' में प्रकाशित हुआ है। रोमेरो का सुझाव है कि द्वैभाषी शिक्षा के दृष्टिकोण में एक विशेष पूर्वाग्रह है, जो एनजीओ के एजेंडे से प्रभावित हो सकता है। इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यह मुद्दा पेरू की शिक्षा नीति और एनजीओ की भूमिका पर बहस को जन्म दे सकता है। आगे की जांच से इस आरोप की पुष्टि हो सकती है या नहीं, यह देखना होगा।
