आल्टो विश्वविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) कौशल के मूल्यांकन को कठिन बना रही है। कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्र अब सीधे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उत्पन्न पाठ की प्रतिलिपि बना सकते हैं। इससे परीक्षाओं में धोखाधड़ी करना आसान हो गया है। यह स्थिति शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है, क्योंकि यह छात्रों की वास्तविक क्षमताओं को मापना मुश्किल बना देती है। प्रोफेसर का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए नए मूल्यांकन विधियों की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के साथ, शैक्षणिक संस्थानों को धोखाधड़ी को रोकने और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।