दक्षिण कोरिया के ग्योंगगी प्रांत द्वारा संशोधित श्रम कानून, जिसे 'पीली लिफाफा कानून' के नाम से जाना जाता है, को लागू करने के लिए बनाई गई शिक्षा सामग्री विवादों में घिर गई है। आरोप है कि इस सामग्री में नियोक्ता की जिम्मेदारी से बचने के तरीके बताए गए हैं। यह कानून श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन शिक्षा सामग्री की प्रकृति पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों और श्रमिक संगठनों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उनका कहना है कि यह कानून के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। ग्योंगगी प्रांत सरकार ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सामग्री का उद्देश्य कानून की सही व्याख्या करना था। इस मामले ने दक्षिण कोरिया में श्रम कानूनों और नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों पर बहस को फिर से जन्म दे दिया है। आगे की जांच से इस विवाद का समाधान होने की उम्मीद है।