सिंगापुर में तेओचेव भाषा में बनी फिल्म को लेकर जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह देश की भाषा नीति से असहमति नहीं दर्शाता। नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी की भाषाविज्ञान प्रोफेसर तान यिंग यिंग के अनुसार, यह एक मरती हुई भाषा के लिए गहरा शोक है। फिल्म तेओचेव भाषा के प्रति लोगों की भावनाओं को दर्शाती है। यह फिल्म सिंगापुर में ‘बोलियों’ के प्रति दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाती है। प्रोफेसर तान का कहना है कि फिल्म की लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि लोग अपनी भाषाई विरासत को संजोना चाहते हैं। यह फिल्म सिंगापुर की बहुभाषी संस्कृति में भाषा के महत्व को भी उजागर करती है। फिल्म तेओचेव समुदाय के लिए अपनी पहचान और संस्कृति को बनाए रखने का एक माध्यम बन गई है।