संघीय सरकार ने शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सालाना दस घंटे की सीमा लगा दी है। यह बदलाव इस साल वसंत ऋतु में स्वास्थ्य संबंधी सह-भुगतान लागू करने के साथ ही चुपचाप लागू किया गया था। मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने इस फैसले के खिलाफ सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की है, लेकिन अभी तक उन्हें सीमित सफलता मिली है। इस नीति के कारण शरणार्थियों को आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिलने में कठिनाई हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि यह सीमा शरणार्थियों की नाजुक स्थिति को देखते हुए अपर्याप्त है, जो अक्सर आघात और तनाव का सामना करते हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम संसाधनों के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इस मुद्दे पर बहस जारी है और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का दबाव सरकार पर जारी रहने की संभावना है।
