विशेषज्ञों का कहना है कि रात में रोशनी जलाकर सोने की आदत शरीर की स्वाभाविक जैविक घड़ी, जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैं, को बिगाड़ सकती है। इस प्रथा से नींद की गुणवत्ता में कमी आ सकती है और लंबे समय तक शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सर्कैडियन रिदम शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है, जिसमें नींद-जागने का चक्र भी शामिल है। रोशनी के संपर्क में आने से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का उत्पादन बाधित होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है। लगातार नींद की कमी से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, बेहतर नींद और स्वास्थ्य के लिए रात में अंधेरे में सोने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोशनी कम करने या पूरी तरह से बंद करने से सर्कैडियन रिदम को सामान्य रखने में मदद मिलती है।