सरकार ने 2026 के लिए पूरक ऋण परियोजना में एक प्रस्ताव रखा है जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के सामूहिक सौदेबाजी अधिकारों पर अस्थायी लाभों की समय सीमा लगाई जाएगी। अर्थ मंत्रालय (MEF) का यह प्रस्ताव सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि को अस्थायी बनाने की बात करता है। श्रमिक संघों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे कानून 31188 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि इससे सामूहिक सौदेबाजी का मूल स्वरूप ही बदल जाएगा। सरकार का तर्क है कि यह वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इस प्रस्ताव के पारित होने पर, भविष्य में सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थायी वेतन वृद्धि प्राप्त करना कठिन हो सकता है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और सरकार के बीच तनाव का कारण बन सकता है।