फ़िलिंटो लीमा के अनुसार, 11वीं और 12वीं कक्षा की राष्ट्रीय परीक्षाओं के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया बहुत खराब तरीके से शुरू हुई। उन्होंने बताया कि परीक्षाओं का डिजिटल मूल्यांकन एक बहुत ही जोखिम भरा कदम था। डिजिटलीकरण करने से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की गई थी, जिसके कारण कई तकनीकी और कार्यान्वयन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हुईं। लीमा ने इस प्रक्रिया में शामिल अनिश्चितताओं और संभावित गलतियों पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है ताकि छात्रों के अधिकारों की रक्षा की जा सके। इस नई प्रणाली की सफलता के लिए उचित बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यह प्रक्रिया एक फिल्म की तरह चल रही है, जिसमें अप्रत्याशित घटनाएँ घटित हो सकती हैं।