नेपाल में प्रवासी श्रमिकों की व्यवस्था मुख्यतः भर्ती एजेंसियों के माध्यम से संचालित होती है, लेकिन इसी के साथ कई तरह के शोषण के मामले भी सामने आते हैं। भर्ती करने वाली एजेंसियों का कहना है कि दोषपूर्ण सरकारी नीतियों और कमजोर विनियमन के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। वहीं, सरकारी अधिकारी इन एजेंसियों पर नियमित रूप से विदेशी रोजगार कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हैं। इन श्रमिकों को अक्सर विदेशों में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहाँ उन्हें कम वेतन और असुरक्षित माहौल में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। सरकार और भर्ती एजेंसियां दोनों ही इस समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाने में विफल रही हैं। इस शोषण को रोकने के लिए सख्त नियमों और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है। यह मामला नेपाल के हजारों श्रमिकों के जीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ है।