कूरियर और डिलीवरी कर्मियों जैसे ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों को न्यूनतम वेतन लागू करने का प्रस्ताव एक बार फिर विफल हो गया है। इस प्रस्ताव पर मतदान में 11 सदस्यों ने समर्थन किया जबकि 15 सदस्यों ने विरोध किया, जिसके कारण यह खारिज हो गया। यह मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, क्योंकि इन श्रमिकों को अक्सर उचित वेतन और कार्य परिस्थितियों से वंचित रखा जाता है। सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच इस मामले पर आगे चर्चा होने की संभावना है। इस फैसले से प्रभावित श्रमिकों में निराशा है, जो बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और आय की उम्मीद कर रहे थे। भविष्य में इस मुद्दे को सुलझाने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा सकते हैं। इस परिणाम से पता चलता है कि इस क्षेत्र में श्रमिकों के अधिकारों को लेकर अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां मौजूद हैं।