अर्जेंटीना की सरकार ने स्वीकार किया है कि राष्ट्रपति के पास न्यायाधीशों के कार्यकाल को लेकर "विवेकाधिकार" का अधिकार है। इस विवेकाधिकार को लेकर ही इरुरुzun को हटाया गया और कार्लोस महिकेस और विक्टर पेसिनो का कार्यकाल बढ़ाया गया है। सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है। यह निर्णय न्यायिक नियुक्तियों और राष्ट्रपति के अधिकारों से जुड़े राजनीतिक विवादों को जन्म दे सकता है। इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। राष्ट्रपति मिलई के इस कदम से अर्जेंटीना की राजनीति में और उथल-पुथल होने की संभावना है।