दो प्रमुख यूनियनों के अनुसार, हाल ही में हुए पितृत्व अवकाश सुधारों के बाद कार्यस्थलों पर पुरुषों के साथ भेदभाव बढ़ा है। यूनियनों का कहना है कि कुछ नियोक्ता पुरुषों को पितृत्व अवकाश लेने पर नौकरी से निकालने की धमकी दे रहे हैं। यह विशेष रूप से दो पुरुष-प्रधान उद्योगों में देखा गया है। यूनियनों ने इस व्यवहार को अस्वीकार्य बताया है और इसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उनका मानना है कि पितृत्व अवकाश एक कानूनी अधिकार है और कर्मचारियों को इसका उपयोग करने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस मुद्दे पर आगे जांच और उचित कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि कार्यस्थलों पर समानता सुनिश्चित की जा सके। यूनियनों ने सरकार और नियोक्ताओं से इस समस्या को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है।