डेनमार्क में एक विश्लेषक, फ्रेडरिक एनेवोल्डसेन ने लॉबिंग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि लॉबिंग को लोकतंत्र की अनिवार्यता बताना, इसकी कमियों को अनदेखा करना है। लॉबिंग अक्सर शक्तिशाली समूहों को और अधिक मजबूत बनाती है, जिससे आम नागरिकों की आवाज़ दब जाती है। एनेवोल्डसेन का मानना है कि ऐसी व्यवस्था में, राजनेताओं तक पहुँचने और अपनी बात रखने के लिए महंगे लॉबिस्टों की आवश्यकता पड़ सकती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह स्थिति लोकतंत्र को सभी के लिए सुलभ होने से रोकती है। इस बहस ने डेनमार्क में राजनीतिक पहुँच और प्रभाव के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है।