आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाली सामाजिक लीजिंग योजना के तीसरे संस्करण में सीमित संख्या में ही वाहनों को शामिल किया गया है। यह योजना मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा कारों के लिए ही उपलब्ध होगी। विदेशी वाहन निर्माताओं की गाड़ियाँ इस योजना से लगभग पूरी तरह से बाहर रखी गई हैं। सरकार का यह कदम घरेलू वाहन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। योजना का लक्ष्य कम आय वाले परिवारों को किफायती दरों पर वाहन उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से विदेशी वाहन कंपनियों को नुकसान होगा, जबकि घरेलू कंपनियों को लाभ होगा। इस योजना के तहत, पात्र नागरिक कम ब्याज दरों पर वाहन लीज पर ले सकते हैं।