पूर्व जांच न्यायाधीश हर्वे लेहमैन के अनुसार, लihanna की मृत्यु के बाद न्यायपालिका में संसाधनों की कमी की बात अक्सर व्यक्तिगत जवाबदेही के प्रश्न से ध्यान भटकाने के लिए की जाती है। उनका तर्क है कि संसाधनों की कमी को बार-बार उजागर करने से न्यायपालिका अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाने से बचती है। लेहमैन का मानना है कि यह एक ढाल के रूप में काम करता है, जिससे न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी से बचा जा सकता है। वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि संसाधनों की कमी एक वास्तविक समस्या हो सकती है, लेकिन यह न्यायपालिका की विफलताओं का एकमात्र कारण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि न्यायाधीशों के कार्यों की समीक्षा की जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। यह टिप्पणी न्यायिक प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। लेहमैन का विश्लेषण न्यायिक प्रक्रिया में जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है।