राष्ट्रपति ने अटॉर्नी जनरल गालियारद-मियारा से संपर्क किया और सैन्य कर्मियों की गिरफ्तारी के स्थान पर आर्थिक प्रतिबंधों जैसे विकल्पों की जांच करने का अनुरोध किया जो पार्टी से हट गए हैं। अटॉर्नी जनरल ने राष्ट्रपति को सरकार को संदर्भित किया, और राष्ट्रपति ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की। यह अनुरोध इस मुद्दे पर कानूनी अनिश्चितता को दर्शाता है, जहां राष्ट्रपति गिरफ्तारी के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जबकि अटॉर्नी जनरल सरकार को निर्णय लेने के लिए कह रही है। यह घटना उन सैनिकों की स्थिति के बारे में सवाल उठाती है जो अपने राजनीतिक दल से हटने का फैसला करते हैं और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं। वर्तमान में, इस मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रपति के अनुरोध पर प्रतिक्रिया का अभाव राजनीतिक गतिरोध को दर्शाता है। यह देखना बाकी है कि सरकार इस मुद्दे को कैसे संबोधित करेगी।