ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद बैंकों के डूबे हुए ऋणों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में, इस वर्ष डूबे ऋणों की राशि 1 बिलियन यूरो से बढ़कर 1.4 बिलियन यूरो हो गई है। यह वृद्धि बैंकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण हुई है। बैंकों ने अब इस स्थिति का आकलन करना शुरू कर दिया है और नुकसान को कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं। इस वृद्धि से वित्तीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए इस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।