मनोवैज्ञानिक जोहान्स डोर्न के अनुसार, खुशहाल जीवन जीने के लिए आवश्यक आय व्यक्तिपरक है, लेकिन एक निश्चित स्तर के बाद आय में वृद्धि से खुशी पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। अध्ययन में पाया गया कि पीढ़ी Z, पिछली पीढ़ियों की तुलना में इस प्रश्न का उत्तर अलग तरीके से देती है। वे वित्तीय सुरक्षा से अधिक, जीवन में अर्थ और उद्देश्य को महत्व देते हैं। डोर्न का कहना है कि खुशी केवल भौतिक वस्तुओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सामाजिक संबंधों, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास जैसे कारकों पर भी निर्भर करती है। यह अध्ययन आय और जीवन संतुष्टि के बीच जटिल संबंध को दर्शाता है। निष्कर्ष बताते हैं कि धन एक निश्चित बिंदु तक खुशी बढ़ा सकता है, लेकिन उसके बाद अन्य गैर-भौतिक कारक अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यह शोध व्यक्तिगत मूल्यों और जीवनशैली विकल्पों के महत्व पर प्रकाश डालता है।
