सरकार ने सरकारी कंपनियों के निदेशकों और पर्यवेक्षी बोर्डों को दिए जाने वाले शुल्क पर नियंत्रण कर दिया है। कंपनियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक श्रेणी के लिए मुआवजे का स्तर निर्धारित किया गया है। हालाँकि, सरकार के पास अधिकतम से अधिक मूल वेतन को मंजूरी देने का अधिकार है यदि उसे उचित लगे। यह कदम सरकारी धन के अधिक प्रभावी उपयोग और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस नए विनियमन से उम्मीद है कि सरकारी कंपनियों में जवाबदेही और बढ़ेगी। पारदर्शिता लाने और धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार होने की भी उम्मीद है।

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