जर्मनी में 1950 के दशक में एक प्रयोग किया गया था जिसमें सभी सार्वजनिक सड़कों से गति सीमा हटा दी गई थी। इस प्रयोग का उद्देश्य ड्राइवरों को पूर्ण स्वतंत्रता देना था, लेकिन इसके परिणाम विनाशकारी रहे। अनुमान है कि इस दौरान लगभग 70,000 लोगों की जान गई, जिससे यह दुनिया का सबसे खतरनाक सड़क प्रयोग बन गया। आज, जर्मनी के ‘ऑटोबान’ अपनी गति सीमा-मुक्त सड़कों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यह अतीत एक गंभीर चेतावनी है। गति सीमा हटाने के फैसले ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया और दुर्घटनाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई। इस प्रयोग ने गति सीमा के महत्व को उजागर किया और भविष्य में सड़क सुरक्षा नीतियों को प्रभावित किया। यह घटना जर्मनी के इतिहास में एक दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है।