लगभग 610 ईस्वी में, मुहम्मद को अल्लाह का पैगंबर घोषित किया गया था। इसके बाद, मक्का में इस्लाम का प्रसार शुरू हुआ, हालांकि इसे लगातार विरोध का सामना करना पड़ा। शुरुआती मुसलमानों ने मक्का में उत्पीड़न का सामना किया, जिसके कारण उन्होंने हिजरत (प्रवास) करने का निर्णय लिया। इस प्रारंभिक प्रवास के दौरान, मक्का के एक ईसाई शासक ने पैगंबर के साथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह घटना इस्लाम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जिसने नए विश्वास के प्रसार के लिए मार्ग प्रशस्त किया। शुरुआती प्रवास ने मुसलमानों को उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की और उन्हें अपनी धार्मिक गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति दी। इस घटना ने इस्लाम और ईसाई धर्म के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का भी प्रदर्शन किया।