केंद्रीय बैंक के एक अध्ययन में पिछले तीन दशकों में तीन ऋण उछालों की पहचान की गई है - 1994-96, 2008-10 और 2020-22। अध्ययन के अनुसार, इन तीनों उछालों के बाद आर्थिक विकास धीमा हुआ। इसके अतिरिक्त, बाहरी घाटे बढ़े और ऋण प्राप्त करना कठिन हो गया। यह दर्शाता है कि तीव्र ऋण वृद्धि अक्सर आर्थिक अस्थिरता और मंदी का संकेत होती है। शोध में इस बात पर जोर दिया गया है कि ऋण के प्रवाह की निगरानी करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसे उछालों से बचने के लिए नीति निर्माताओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह अध्ययन ऋण-संचालित विकास के जोखिमों को उजागर करता है।