वर्तमान में अत्यधिक नियम-कायदे सरकारी कामकाज के डिजिटलीकरण में रुकावट डाल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के युग में, सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है। सख्त नियमों के कारण नई तकनीकों को अपनाने में देरी हो रही है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता प्रभावित हो रही है। यह स्थिति नौकरशाही को और अधिक जटिल बना रही है और नागरिकों को समय पर सेवाएं मिलने में बाधा उत्पन्न कर रही है। सरकार अब इस मुद्दे पर विचार कर रही है कि कैसे नियमों को सरल बनाया जाए ताकि डिजिटल बदलाव को गति दी जा सके। जवाबदेही के नए मानकों पर बहस जारी है, जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाना है। इस बदलाव से सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
