अनाक्सीमेंडर, जो प्राचीन यूनानी दार्शनिक थे और थेल्स के शिष्य थे, ब्रह्मांड की लय को समझने का प्रयास कर रहे थे। वे पूर्व-सुकराती दार्शनिकों में से एक माने जाते हैं। उनका मानना था कि ब्रह्मांड में एक अंतर्निहित व्यवस्था है जिसके अनुसार अन्याय का बदला समय के साथ लिया जाता है। अनाक्सीमेंडर का यह विचार, कि "चीजें एक दूसरे को अपने अन्याय का दंड समय के क्रम के अनुसार देती हैं," उनके दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना के बारे में भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उनके कार्य ने बाद के यूनानी दर्शन और विज्ञान पर गहरा प्रभाव डाला। अनाक्सीमेंडर का योगदान प्रारंभिक दार्शनिक चिंतन में महत्वपूर्ण माना जाता है।
