दवा विकास एक लंबी और महंगी प्रक्रिया है, जिसमें से केवल दस में से एक दवा ही बाजार तक पहुँच पाती है। वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा बनाए गए डेटासेट का उपयोग करके क्लिनिकल परीक्षणों की सफलता दर को बढ़ाया जाए। इसके लिए, वे ‘वर्चुअल मरीज’ और ‘डिजिटल जुड़वाँ’ जैसे उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। ये तकनीकें रोगियों के विस्तृत मॉडल बनाने में मदद करती हैं, जिससे परीक्षणों में अधिक डेटा उपलब्ध होता है। इससे दवाओं के परीक्षण को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया जा सकता है। एआई-जनित डेटासेट डेटा की कमी को पूरा करने और परीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायक होंगे। इस नवाचार से दवा विकास में क्रांति आने की उम्मीद है।

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