1985 में, विशेषज्ञ प्रणालियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य के रूप में देखा जा रहा था, जिनमें मानव जैसी तर्क क्षमता होने की उम्मीद थी। ये प्रणालियाँ, चिकित्सा, परमाणु ऊर्जा और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग की जा रही थीं। इनका मुख्य उद्देश्य मानव विशेषज्ञों के तर्क प्रक्रिया का स्वचालित रूप से अनुकरण करना था। इसके लिए एक विशेष प्रोग्रामिंग भाषा का उपयोग किया गया था। विशेषज्ञ प्रणालियों ने शुरुआती AI अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन बाद में उनकी सीमाएं स्पष्ट हो गईं। फिर भी, ये प्रणालियाँ AI के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुईं। वर्तमान AI तकनीकों के लिए भी ये शुरुआती प्रयोग नींव का काम करते हैं।