ज़िम्बाब्वे की सीनेट ने एक विधेयक पारित किया है जिसके तहत राष्ट्रपति इमर्सन म्नांगवा 2030 तक पद पर बने रहेंगे। यह कदम विपक्षी दलों द्वारा "संवैधानिक तख्तापलट" के रूप में आलोचना की जा रही है। विधेयक के पारित होने से राष्ट्रपति म्नांगवा, जिनकी उम्र 83 वर्ष है, अगले छह वर्षों तक सत्ता में बने रहेंगे। आलोचकों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और राजनीतिक विरोध को दबाने का प्रयास है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार द्वारा उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उनकी आवाज़ को दबाया जा रहा है। इस विधेयक को लेकर ज़िम्बाब्वे में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। यह घटनाक्रम देश की राजनीतिक स्थिरता और भविष्य के चुनावों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
