हाल के अध्ययनों से पता चला है कि युवा पीढ़ी की तुलना में बुजुर्ग लोग अकेले रहने या शांत रहने में कम असहज महसूस करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतर 'हाइपरकनेक्टिविटी' और स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग के कारण है। युवा पीढ़ी लगातार डिजिटल दुनिया से जुड़ी रहती है, जिससे उन्हें शांत रहने या अकेले रहने में कठिनाई होती है। स्क्रीन की लगातार चमक और सूचना का प्रवाह उनके मस्तिष्क को उत्तेजित रखता है, जिससे वे आसानी से ऊब जाते हैं। वहीं, बुजुर्गों ने जीवन में शांत क्षणों का अनुभव किया है और वे अकेलेपन से निपटने के लिए अधिक अनुकूलित हैं। यह अध्ययन डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं का कहना है कि युवाओं को शांत रहने और अकेले समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।