नए विश्व कप प्रारूप, जिसमें आपसी मुकाबले और तीसरे स्थान की रैंकिंग को महत्व दिया गया है, के कारण कुछ मैचों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना कम हो गई है। इस बदलाव से टीमों के बीच गणनाएं और रणनीतिक समझौते बढ़ने की आशंका है, जिससे खेल की निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञ इस प्रारूप की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि यह कुछ टीमों को जानबूझकर हारकर या ड्रॉ खेलकर अगले दौर में जाने का अवसर दे सकता है। इससे प्रशंसकों के लिए रोमांच कम हो सकता है और खेल की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। यह प्रारूप तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के लिए भी जटिलताएं पैदा करता है, क्योंकि उन्हें अगले दौर में जाने के लिए विशिष्ट परिणामों की आवश्यकता होती है। कुल मिलाकर, यह बदलाव विश्व कप की प्रतिस्पर्धात्मकता और निष्पक्षता को लेकर बहस को जन्म दे रहा है।
