मोटापा रोधी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर लोगों में शर्म और झिझक देखी जा रही है। टीना सालोनन जैसी कई व्यक्ति ओज़ेम्पिक जैसी दवाएँ लेने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि लोग उन पर ‘असली रोगियों’ से दवाएँ छीनने का आरोप लगाएँगे। ये दवाएँ वजन घटाने में प्रभावी साबित हो रही हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल पर खुलकर बात करना मुश्किल हो रहा है। तीन ऐसे लोगों ने अपनी कहानियाँ साझा की हैं जिन्होंने इन दवाओं से वजन कम किया है, और बताया है कि इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा क्यों कठिन है। वे सामाजिक दबाव और गलत धारणाओं से जूझ रहे हैं। यह स्थिति मोटापा और इसके उपचार को लेकर व्याप्त सामाजिक कलंक को दर्शाती है। इन दवाओं के उपयोग को लेकर गोपनीयता और चुप्पी का माहौल है।
