देश में बिजली कटौती की समस्या गंभीर बनी हुई है, जिसके पीछे एक बड़ा कारण थर्मल पावर प्लांटों की खराब हालत है। इन प्लांटों की स्थापित क्षमता 21,000 मेगावाट है, लेकिन वे केवल 2,700 मेगावाट ही उत्पादन कर पा रहे हैं। यह कमी रखरखाव की कमी और निवेश की कमी के कारण है। सरकार ने 4,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जोड़ने का वादा किया था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि थर्मल पावर प्लांटों में निवेश और रखरखाव पर ध्यान देना आवश्यक है। इस समस्या के कारण बिजली की राशनिंग जारी है और आम लोगों को परेशानी हो रही है। यह देश के ऊर्जा संकट को और बढ़ा रहा है।

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