अमेरिका में चीनी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में शुरू किए गए 'चाइना इनिशिएटिव' से भी अधिक आक्रामक है। पूर्व सहायक अमेरिकी अटॉर्नी रॉबर्ट फिशर के अनुसार, यह स्थिति 'चाइना इनिशिएटिव 2.0' के समान है। इस कार्रवाई के तहत, चीनी मूल के विद्वानों और शोधकर्ताओं की जांच और अभियोजन में वृद्धि हुई है। आलोचकों का तर्क है कि यह अभियान वैज्ञानिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक है, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह भेदभावपूर्ण है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है। इस नई पहल से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
