न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को डर था कि इजराइल ईरान के शीर्ष वार्ताकारों, जैसे कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची की हत्या कर सकता है। इस आशंका के चलते अमेरिका ने ईरान को अनौपचारिक रूप से चेतावनी दी कि इजराइल ऐसा कदम उठा सकता है। अमेरिका का मानना था कि इस तरह की हत्याएं परमाणु वार्ता को पटरी से उतार सकती हैं। यह चेतावनी सीधे तौर पर नहीं दी गई थी, लेकिन ईरान को खतरे से अवगत कराया गया था। इस मामले ने अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव को भी उजागर किया है, क्योंकि इजराइल पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत को बचाने के लिए चिंतित था और किसी भी तरह की बाधा को दूर करने के लिए प्रयासरत था।

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