अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे ने सकारात्मक बताया है। हालांकि, रुटे ने इस समझौते के साथ ही यूरोप की सुरक्षा को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों के रवैये की आलोचना की है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि यूरोप पर हमले की स्थिति में, वह नाटो को पहले से तय समर्थन देने के लिए बाध्य नहीं होगा। इस बयान से नाटो के भीतर तनाव बढ़ने की आशंका है। यह कदम यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पर भी पुनर्विचार का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकती है।