अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मैक्स केसेल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, लेकिन इसे पूर्ण शांति संधि नहीं माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता एक “समझौते की रूपरेखा” (memorandum of understanding) है, न कि कोई अंतिम शांति समझौता। केसेल के अनुसार, संघर्ष के कई मुख्य मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। यह दस्तावेज़ केवल आगे की बातचीत और समाधान की दिशा में एक प्रारंभिक बिंदु है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है, लेकिन स्थायी शांति स्थापित होने में अभी समय लगेगा। इस समझौते के बाद भी, कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यह समझौता फिलहाल एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अंतिम परिणाम भविष्य के वार्तालापों पर निर्भर करेगा।