यह लेख आंतरिक उपनिवेशवाद से मुक्ति की तात्कालिक आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। लेखक बताते हैं कि पहले, औपनिवेशिक उत्पीड़न एक सरल समीकरण पर आधारित था: एक विदेशी शक्ति संसाधनों का दोहन करती थी और प्रतिरोध को दबाती थी। अब, यह प्रणाली अधिक जटिल है, जिसमें "अंतर्जात उपनिवेशक" शामिल हैं—ऐसे लोग जो उत्पीड़न के ढांचे के भीतर काम करते हैं। यह लेख दर्शाता है कि हमें अधीनता की मानसिकता को त्यागने की आवश्यकता है। यह आंतरिक उपनिवेशवाद से मुक्ति के महत्व पर जोर देता है, जो स्वयं को स्वतंत्र करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उपनिवेशवाद का प्रभाव आज भी मौजूद है, और आंतरिक उपनिवेशवाद से निपटना जरूरी है।

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