यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की मान्यता कई बार इनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। अत्यधिक पर्यटन, मुख्य समस्या बनकर उभरा है, जिससे इन स्थलों के संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कार्पेथियन पर्वतमाला में स्थित एक स्लोवाक गांव इसका उदाहरण है, जहाँ वार्षिक पर्यटकों की संख्या स्थानीय निवासियों से 5,000 गुना अधिक है। इस भारी भीड़भाड़ से स्थानीय जीवन और पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद, कुछ स्थलों को अपनी पहचान और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने में कठिनाई हो रही है। यह स्थिति विश्व धरोहर स्थलों के प्रबंधन और सतत पर्यटन के महत्व पर प्रकाश डालती है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए, पर्यटन को नियंत्रित करने और स्थानीय समुदायों को शामिल करने की आवश्यकता है।