स्वीडिश पत्रकार लीसा मैग्नसन के अनुसार, ज़ैदा कैटलान की हत्या की ज़िम्मेदारी सीधे तौर पर उन पर नहीं थी। यह मामला और सजा दोनों ही असाधारण हैं। कैटलान, जो संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करती थीं, की हत्या हो गई थी, लेकिन मैग्नसन का कहना है कि अभी तक संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें न्याय नहीं दिलाया है। यह मामला एक दुर्लभ परिस्थिति को दर्शाता है जहाँ एक कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी, संगठन की ओर से उचित कार्रवाई का अभाव है। मैग्नसन ने इस पर प्रकाश डाला है कि संयुक्त राष्ट्र को इस मामले में अपनी भूमिका और जवाबदेही पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह घटना अंतरराष्ट्रीय संगठनों में कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके प्रति जवाबदेही के सवाल खड़े करती है। मामले की जटिलता और असामान्य प्रकृति के कारण, यह कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है।