यूक्रेन द्वारा रूस में किए गए हालिया ड्रोन हमलों से रूस की तेल शोधन क्षमता का 20 से 40 प्रतिशत हिस्सा निष्क्रिय हो गया है। हेलसिंकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वेली-पेक्का टिनक्यनेन का मानना है कि रूस की पहचान की राजनीति जीवाश्म ऊर्जा पर आधारित है, इसलिए ये हमले रूस को हिला सकते हैं। इन हमलों के कारण रूस को भारी छूट पर दुनिया में कच्चा तेल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और रॉयटर्स के सूत्रों ने भी जून और अप्रैल में रूस की तेल शोधन क्षमता में गिरावट की बात कही थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं। यह स्थिति रूस की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा नीति पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। इन हमलों का उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना है।